मेरे विचार
*एक बार तो पढ़ना चाहिए आपको मेरे इस पूरे लेख को।*
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मैं परिवार के मामले को रिश्तेदार, दोस्त और पहचान वालो से अलग रखना पसंद करता हूं।
क्योंकि मैं जानता हूं पारिवारिक मामले को सार्वजनिक करूंगा तो मेरा परिवार टूट जाएगा।
परिवार के कुछ सदस्यों के साथ मेरा भी अन बन था फिर मैने सोचा जितना ज्यादा खींचूंगा हमारा परिवार टूटता जायेगा और मैंने वो कसमें तोड़ दि जो जिससे मुझे लगा कि परिवार में दरार बढ़ता जाएगा।
आज भले ही कुछ लोग और रिश्तेदार मेरी छोटी सी गलती को बढ़ा कर मेरे चरित्र पर दाग लगा रहे हो लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।
ये समाज मेरे शादी के लिए किए गए गलती और मेरी निजी जिंदगी पर बढ़ चढ़ बात करेगी लेकिन खुद का चरित्र कभी नहीं देखेगी।
जब भविष्य में मेरे पास कुछ नहीं होगा और अर्धांगिनी जब मुझसे कुछ मांगेगी तो वो मेरी जिम्मेदारी होगी उसकी जरूरतो को पूरा करना, समाज नहीं आएगा।
अगर मेरी मृत्यु हो गई तो ये समाज मेरे परिवार को चलाने नहीं आएगी।
अगर मेरे और मेरे अर्धांगिनी का संबंध खराब हो जाता हैं और हम अलग होते हैं (तलाक) तो ये समाज नहीं आएगी।
समाज सिर्फ खामियां निकाल सकता है।
समाज प्रतिष्ठा का हनन कर सकता हैं।
*मैं तो अपना गलती मानता हूं लेकिन क्या ये समाज अपनी गलती मान सकती हैं।*
मैं समाज में पनप रहे वैसे चलित्रहिन मर्द समाज का हिस्सा नहीं हू जिसे दूसरे के बहन, बेटी के रूप में प्रेमिका तो पसंद आता है लेकिन खुद के बहन-बेटी के जिंदगी में प्रेमी का आना प्रतिष्ठा का हनन लगता हैं।
मेरी बाते कड़वी लग सकती हैं क्योंकि मैं सत्य बोलता हूं और सत्य हमेशा करवा होता हैं।
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अगर इसमें कुछ त्रुटि दिखे तो जरूर बताइए क्योंकि मैं अपने गलतियों से सीखना पसंद करता हूं।
मुझे बिल्कुल भी बुरा नहीं लगता जब कोई व्यक्ति मुझे मेरी गलती बताता है या मुझे गलत साबित करता हैं। मै भी इंसान हूं और गलती इंसान से ही होती हैं।
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*माफ़ी चाहूंगा अगर मेरी बातों से किसो को ठेस पहुंचा हो तो*
✍︎ SSpD Sunny Raj
इससे संबंधित सारी बातें मैं अपने किताब मेरे विचार में लिखूंगा तो आप लोग उस किताब को जरूर पढ़ना।
किताब प्रकाशित करने कि तिथि अभी तय नहीं है।
SSpD Sunny Raj 
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